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kahani hindi mai

kahani hindi me for kids, the best hindi kahani in hindi read kahani and enjoye it  दूर से ही खाना सूंघ कर सटीक परिणाम बताने वाले मुफ्तखोर गिरधारी लालजी दफ्तर में ‘कुत्ते’ की उपाधि से नवाजे गए हैं. कालोनी में नया शिकार जान कर उन्होंने जब हमारे घर डेरा डाला तो जनाब पूछिए मत कि कैसे पीछा छुड़ाया. दफ्तर से लौटने के बाद मैं ड्राइंगरूम जमाने में व्यस्त था और मेरी पत्नी प्रभा मेरे लिए नाश्ता बनाने में. 3 रोज पहले ही हम इस नई कालोनी में शिफ्ट हुए थे. अचानक दरवाजे की घंटी बजी. मैं ने दरवाजा खोला तो देखा एक सज्जन खड़े थे. मुझे देखते ही बोले, ‘‘नमस्ते, शर्माजी.’’ मैं ने उन के अभिवादन का जवाब दिया और पूछा, ‘‘मैं ने आप को पहचाना नहीं. बोलिए मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’ ‘‘सेवा तो मैं करने आया हूं आप की,’’ वे बोले, ‘‘वैसे मुझे गिरधारी लाल कहते हैं. आप की कालोनी में ही, आप से 3 ब्लौक दूर रहता हूं. सोचा, आप से मुलाकात कर लूं. आप नए आए हैं. मेरे लायक कोई काम हो तो बेखटके बता दीजिएगा. कालोनी में तो ज्यादा लोग ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ अपने से मतलब है.’’ मैं उन की बातों से बहुत प्रभावि...

Hindi story for kids

hindi kahani for kids in hindi language. the best collection of hindi hindi story and many types of kahaniya and kahaniyan for kids अजय स्वयं को पल भर भी तो नहीं रोक सका था माँ को कड़वा उत्तर दिये बगैर । जो गलतियाँ अन्नी के साथ हुईं वो इस बच्ची के साथ हरगिज़ नहीं दौहराई जाएंगी ऐसा निश्चय किया अजय ने । माता-पिता और पत्नी के लाख आग्रहों के बावजूद अजय ने किसी दूसरी संतान के विषय में सोचा तक नहीं । अपनी वंश परंपरा का संवाहक उसने अपनी बेटी को ही बनाया । परिवार द्वारा दूसरी संतान के आग्रह पर वो हर बार यही तर्क देता कि , " तुम कहती हो मैं अपनी इस नन्ही सी बच्ची को आभा के भरोसे छोड़ दूँ ?   नहीं माँ , मैं अन्नी को दुबारा मरने नहीं दे सकता ।" " माँ बाबूजी , अगर अन्नी भी आपकी इकलौती संतान होती तो क्या आप उसकी शिक्षा और व्यक्तित्व पर ध्यान नहीं देते ?   और अगर वो भी हम तीनों भाइयों की तरह बड़ी -- बड़ी कंपनियों की कमान संभाल रही होती तो क्या अपनी बुद्धि को एक तरफ रख अपने तन पर लिपा गाढ़ा काला रंग ही देखती रहती ?   पचासियों पढ़े - लिखे लोगों की मुखिया बनकर , अपने कैरियर के चम...

kahani in hindi for kids in hindi language

Kahani in hindi kahani in hindi for kids in hindi language चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे।  वे बहुत ही बुद्धिमान और विद्धवान थे। एक बार एक चीनी दूत राजनीती के दर्शन पर चर्चा के लिए उनके पास पहुँचा।  वह चीनी दूत शाही जीवन-शैलीवाला तो था ही, साथ ही अहंकारी भी काम नहीं था। उसने चाणक्य से समय देने का अनुरोध किया। चाणक्य ने उसे रात को अपने घर आने को कह दिया। चीनी दूत तय समय पर चाणक्य की कुटिया पर पंहुचा गया। उसने देखा की चाणक्य अपनी कुटिया में बैठे दिये की रोशनी में कुछ लिख रहे हैं। यह  देखकर वह  आश्चर्य में डूब गया और सोचने लगा कि इतने बड़े साम्राज का प्रधानमंत्री दिये की रोशनी में क्यों काम कर रहा है। उसे लगा कि इससे अच्छा तो चीन में मै ही हूँ। चाणक्य खड़े हुए,सम्मान पूर्वक उसका स्वागत किया और बैठाया। फिर जैसे ही मूल विषय पर बात शुरू होते कि चाणक्य ने उस दिये को बुझा दिया और दूसरा जला लिया। विचार -विमर्श ख़त्म होने पर चाणक्य ने इस दिये को बुझाकर वापस पहलेवाला दिया जला लिया। चीनी दूत पहला दिया बुझाने, दूसरा जलाने और फिर दूसरे को बुझाकर पहलेवाला ज...

Hindi kahaniya for kids in hindi

hinid kahani the hindi kahani in hindi language for kids. एक बार एक सूफी संत अपने एक शिष्य के साथ एक गांव में पहुंचे। तभी उनका अनुयाई उनके पास पहुंचा और बोला, “हे भगवन्, इस शहर में तो अति मूर्ख लोगो की भरमार है। इतने बुद्धिहीन कि कोई कुछ सीखना ही नहीं नहीं चाहता। किसी में भी ज्ञान हासिल करने की इच्छा नहीं है। यहां आप किसी का भी हृदय परिवर्तन नहीं कर पाएँगे।” संत ने इस व्यक्ति से कहा, “तुम सही कह रहे हो।” थोड़ी ही देर बाद संत का एक और अनुयायी वहां पहुंचा और खुशी से कहने लगा, “प्रभु, आप यहां पधारे, यह तो इस गांव का सौभाग्य है। लोग तो आपसे शिक्षा ग्रहण करने के लिए कब से प्रतीक्षा कर रहे हैं।” संत ने इस व्यक्ति को वही जवाब दिया, “तुम सही कह रहे हो।” संत के साथ आए शिष्य ने उनसे पूछा, “आपने पहलेवाले व्यक्ति को भी सही बताया और जो उसके उलट बात कर रहा है, उसे भी आप सही कह रहे हैं। आखिर दोनों सही कैसे हो सकते हैं?” अपने शिष्य की जिज्ञासा शांत करते हुए संत ने कहा, “हर व्यक्ति दुनिया को उसी तरह से देखता है जैसा वह उससे होने की उम्मीद रखता है। इसलिए मैंने दोनों की ही बात का विरोध नह...