kahani in hindi for kids in hindi language

Kahani in hindi

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चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री थे।  वे बहुत ही बुद्धिमान और विद्धवान थे। एक बार एक चीनी दूत राजनीती के दर्शन पर चर्चा के लिए उनके पास पहुँचा।  वह चीनी दूत शाही जीवन-शैलीवाला तो था ही, साथ ही अहंकारी भी काम नहीं था। उसने चाणक्य से समय देने का अनुरोध किया। चाणक्य ने उसे रात को अपने घर आने को कह दिया।
चीनी दूत तय समय पर चाणक्य की कुटिया पर पंहुचा गया। उसने देखा की चाणक्य अपनी कुटिया में बैठे दिये की रोशनी में कुछ लिख रहे हैं। यह  देखकर वह  आश्चर्य में डूब गया और सोचने लगा कि इतने बड़े साम्राज का प्रधानमंत्री दिये की रोशनी में क्यों काम कर रहा है। उसे लगा कि इससे अच्छा तो चीन में मै ही हूँ।
चाणक्य खड़े हुए,सम्मान पूर्वक उसका स्वागत किया और बैठाया। फिर जैसे ही मूल विषय पर बात शुरू होते कि चाणक्य ने उस दिये को बुझा दिया और दूसरा जला लिया। विचार -विमर्श ख़त्म होने पर चाणक्य ने इस दिये को बुझाकर वापस पहलेवाला दिया जला लिया।
चीनी दूत पहला दिया बुझाने, दूसरा जलाने और फिर दूसरे को बुझाकर पहलेवाला जलाने के रहस्य को समझ नहीं पाया। जब वह कुटिया से बहार निकल रहा था तो इस बारे में पूछने  अपने को रोक नहीं पाया। आखिरकार उसने चाणक्य से पूछ ही लिए कि उन्होंने ऐसा क्यों क्यों किया कि एक दीया  बुझाकर दूसरा जलाया और फिर वार्ता ख़त्म होने पर उसे बुझाकर पहले को जला लिया।
इस पर चाणक्य बोले, “जब आप मेरी कुटिया पर पहुँचे थे तब अपना निजी अध्ययन कर रहा  और उसके लिए अपना ही दिया इस्तेमाल कर रहा था। लेकिन जब मैंने आपसे बात शुरू की तो अपना दिया बुझा दिया और सरकारी खर्च से जलनेवाला दिया जला लिया। जैसे ही बात ख़त्म हुई तो सरकारी दीया बुझाकर फिर से अपना दीया जला लिया। कभी मै प्रधानमंत्री होता हूँ तो कभी आम नागरिक ; और मै इन दोनों के बारे में फर्क जनता हूँ। ”
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